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दिव्यांगों को प्रताड़ित करना पड़ेगा अब महंगा सरकारी विभागों को

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :दिव्यांगता नियम, 2018, जिसे राज्य सरकार बनाने का प्रस्ताव करती है, दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 की उप-धारा (1) और (101) के अधिकारों की धारा 101 द्वारा प्रदान की गई शक्तियों के अभ्यास में (2016 का केंद्रीय अधिनियम 49) इस प्रकार से प्रभावित होने की संभावना वाले सभी व्यक्तियों की जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है, और इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि इस अधिसूचना के प्रकाशन की तारीख से पंद्रह दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद या उक्त मसौदा नियमों को ध्यान में रखा जाएगा। नियम 46 के तहत जारी प्रमाण पत्र आम तौर पर सभी उद्देश्यों के लिए मान्य है। – इस अधिनियम के तहत जारी एक प्रमाण पत्र सरकार की योजनाओं के तहत सरकारी संगठनों के तहत स्वीकार्य सुविधाओं, रियायतों और लाभों के लिए आवेदन करने के लिए पात्र व्यक्ति को सक्षम करेगा। इस तरह की शर्तों के अधीन जो प्रासंगिक योजनाओं या सरकार के निर्देश में निर्दिष्ट किया जा सकता है जैसा भी मामला हो। इस धारा के तहत जारी दिव्यांगता का प्रमाण पत्र पूरे देश में मान्य होगा। दिव्यांग अधिनियम 2016 में इस धारा की सबसे बड़ी विशेषता यह है की दिव्यांगों की जितनी भी समस्याएं हैं उसका समाधान 15 दिनों में करने का निर्देश इस धारा में दिया गया जिससे पूरे भारत के दिव्यांग आत्मनिर्भर बन सकें अगर 15 दिनों के भीतर दिव्यांग के किसी कार्य को संबंधित कार्यालय नहीं करता है तो उस विभाग पर न्याय संगत करवाई की जाएगी अब सरकारी विभाग के उदासीनता से बच सकते हैं ।

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