दिव्यांगों की आत्मनिर्भरता और योजनाओं में पारदर्शिता के लिए खास कानून जिसका उपयोग करें भारत के सभी दिव्यांग

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :टेली कानून का इस्तेमाल कर दिव्यांग बन सकते हैं आत्मनिर्भर टेलीफोन सेवाओं के इस्तेमाल से कानूनी सलाह और सेवाएं मुहैया कराते हैं।इस कार्यक्रम के तहत, वकीलों के ग्रुप को गरीब, दिव्यांग, शोषित और वंचित लोगों से जोड़ने के लिए पंचायत स्तर पर आम सूचना केंद्र में मौजूद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, टेलीफोन/तत्काल कॉलिंग जैसी स्मार्ट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाता है, ताकि इन लोगों को सही समय पर अहम कानूनी सलाह मिल सके। टेली- -कानून संवा का मकसद कानूनी समस्याओं को जल्द पहचान करके जरूरी पहल करना और ऐसी समस्याओं को रोकना है। यह सेवा एनएएलएसए और सीएससी -ई गवर्नेस की तरफ से मुहैया कराए जा रहे कार्यकर्ताओं के जरिये समूहों और समुदायों तक पहुंचाई जा रही है। ये जमीनी कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से आवेदकों का पंजीकरण कर उनकी समस्याओं पर सलाह के लिए समय तय करते हैं। लोगों को नियमित तौर पर कानूनी सेवाओं और सलाह मुहैया कराने के लिए वकीलों का एक समूह तैयार किया गया है। टेली-1. कानूनी सेवा प्राधिकरण 1987 के खंड 12 के मुताबिक, इस कार्यक्रम के जरिये अनुसूचित जाति, दिव्यांग,अनुसूचित जनजाति के लोगों (महिलाएं, वच्च समेत) को मुफ्त कानूनी सलाह देने की बात है। बाकी समुदाय के लोगों को 30 रुपये फीस देनी होगी।2. दूर-दराज के इलाके में भी बेहतर तरीके से यह सेवा सुनिश्चित करने के लिए, टेली-कानून एप्लिकेशन बनाया गया है, ताकिसं बंधित कानूनी कार्यकर्ता (पैरा लीगल वालंटियर-पीएलवी) मामलों का पंजीकरण कर सके। कानून के वेब पोर्टल दिव्यांगों के लिए विशेष  व्यवस्था (http://www.tele-law.in/) पर कार्यक्रम के बारे में 22 भाषाओं में विस्तार से जानकारी उपलब्धहै। टेली-कानून के डैशबोर्ड पर पंजीकृत मामलों और सलाह के बारे में रियल-टाइम डेटा मौजूद होता है।4. टेली-कानून मोवाइल एप्लिकेशन के बारे में ई-गाइड, टेली-कानून के पोर्टल पर आधारित है।

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