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दिव्यांगों को शारीरिक भागदौड़ से मिलेगी राहत शादी के पंजीकरण के लिए पार्टियों को शारीरिक रूप से उपस्थिति होने की जरूरत नहीं है।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :दिव्यांगों को मिलेगी शारीरिक भागदौड़ से राहत दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने कहा कि शादी के पंजीकरण के लिए पार्टियों को शारीरिक रूप से उपस्थिति होने की जरूरत नहीं है।वे संबंधित उप मंडल के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हो सकते हैं। न्यायमूर्ति रेखा पल्ली (Justice Rekha Palli) की पीठ ने एक एनआरआई दंपत्ति द्वारा दायर याचिका पर यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उनकी शादी साल 2001 में हुई थी। वर्तमान में अमेरिका में रहते हैं।उन्होंने हाईकोर्ट से दिल्ली सरकार को विवाह के अनिवार्य पंजीकरण आदेश 2014 के तहत उनकी शादी के रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन आवेदन को स्वीकार करने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अधिकारी के समक्ष पेश होने की अनुमति देने का आग्रह किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता विभा दत्ता मखीजा (Vibha Datta Makhija) ने कहा कि सरकार ने विवाह आदेश के प्रावधान चार की गलत व्याख्या की है।मखीजा ने अदालत को बताया कि प्रावधान में व्यक्तिगत शब्द को भौतिक उपस्थिति के रूप में माना जा रहा है। यह याचिकाकर्ताओं को परेशान कर रहा था। उन्होंने कहा कि फिलहाल दोनों अमेरिका में हैं और कोरोना महामारी के कारण भारत नहीं आ सकते। वे एसडीएम के समक्ष उपस्थित नहीं हो सकते। विभा दत्ता ने कहा कि दंपत्ति को यूएस में ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने के विवाह पंजीकरण सर्टिफिकेट की जरूरत थी।

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