दिव्यांगों को कंप्लेन के डर से विजिटर बुक नहीं देते स्टाफरोज महज 10 फीडबैक ही, आखिर कैसे बड़े पर्यटक

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार :पर्यटन विभाग में दिव्यांग अधिनियम 2016 में जो अधिकार दिव्यांगों को दिया गया है उससे वंचित किया जा रहा है दिव्यांगों के लिए अलग से होती है व्यवस्था उसके लिए बुक भी मिलता है लेकिन भारत में अधिकांश पर्यटन स्थान पर संविधानिक अधिकार से दिव्यांग हो रहा वंचित जानिए क्या है नियम कंप्लेन के डर से विजिटर बुक नहीं देते स्टा फरोज महज 10 फीडबैक ही, आखिर कैसे बड़े पर्यटक अगर आप बिहार के समृद्धशाली इतिहास को जानने के लिए पर्यटन सूचना केन्द्र पटना जंक्शन जा रहे हैं तो आपको यहां कोई जानकारी नहीं मिल पाएगी. ये वहां मौजूद पर्यटकों का कहना है. इसकी कंप्लेन के पास पिछले कई दिनों से मिल रही थी पड़ताल करने के लिए पर्यटक बनकर रिपोर्टर जब पहुंचा तो वहां मौजूद स्टाफ जानकारी देने से सीधे मना कर दिया. आज पढ़िए विस्तृत रिपोर्ट….पर्यटक को नहीं देते महत्व नाम नहीं छापने की शर्त पर दिल्ली से पटना आने वाले कई पर्यटकों ने बताया कि पटना जंक्शन आने पर इस केन्द्र पर जरूर जाते हैं लेकिन यहां मौजूद कर्मी जानकारी देने से साफतौर TOURIST INFORMATION CEN पर्यटक सूचना के पर मना कर देते हैं. एक पर्यटक ने बताया कि सैटरडे को विजिटर बुक मांगने पर स्टाफ गाली-गलौज करने लगे, प्रत्यक्षदर्शी की मानें तो ये कोई पहली बार नहीं हुई है यहां इस तरह के मामले अक्सर होते रहते हैं.ऑडिट से खुलेगा राज पर्यटन सूचना केन्द्र पटना जंक्शन की अगर विधिवित ऑडिट कराई जाए। तो विभाग को सच पता चल जाएगा. क्योंकि जंक्शन पर प्रतिदिन दो से तीन लाख लोगों का आवागमन होता है. लेकिन विजिटर बुक में प्रतिदिन 10 लोगों का भी दस्तखत नहीं है. ऐसे में विकास निगम सवाल ये उठता है कि विभाग या तो पर्यटन सूचना केन्द्र पटना जंक्शन पर ध्यान नहीं दे रहा है या स्टाफ की नहीं मिल रहा फीडबैक पटना जंक्शन पर बने पर्यटन सूचना केन्द्र में हजारों पर्यटक प्रतिदिन आते हैं लेकिन उन्हें सही-सही जानकारी नहीं मिल जाती है. वहां रखे विजिटर बुक में भी स्टाफ एंट्री करवाने से मना कर देते हैं, वहां मौजूद एक पर्यटक ने बताया कि कोई पर्यटक फीडबैक में कंप्लेन न लिख दे इसलिए कर्मचारी विजिटर बुक छिपाकर रखते हैं और मांगने पर भी नहीं देते हैं.“ विजिटर बुक पर हर पर्यटक फीडबैक दे सकते हैं. कर्मचारी अगर लापरवाही कर रहा है तो इसे चेक करवा लेते हैं. रही बात अभद्रता की तो प्रधान सचिव के पास लिखित शिकायत भी कर सकते हैं.प्रभाकर, एमडी, बिहार राज्य पर्यटन रिपोर्ट को मान लिया जाता है. इससे लोगों को परेशानी होती है।

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