लंबित सरकारी विभागों ने 92687 करोड़ के खर्च का अबतक नहीं दिया हिसाब बिहार सरकार।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : सबसे ज्यादा उपयोगिता प्रमाणपत्र पंचायती राज के पास लंबित सरकारी विभागों ने 92687 करोड़ के खर्च का अबतक नहीं दिया हिसाब बिहार सरकार के विभागों ने 92687.31 करोड़ रुपये खर्च तो कर दिए मगर उसका हिसाब नहीं दिया है। यह 31 मार्च 2021 तक की स्थिति है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने इस पर आपत्ति की है। सीएजी के मुताबिक अधिक मात्रा में उपयोगिता प्रमाणपत्र का लंबित रहना, निधि के दुरूपयोग एवं धोखाधड़ी के जोखिम / खतरे को बढ़ाता है। गुरुवार को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में पेश सीएजी की रिपोर्ट में बिहार सरकार के वित्तीय कार्यकलापों व हालात का खुलासा है। यह वित्तीय वर्ष 2020-21 की रिपोर्ट है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा उपयोगिता प्रमाणपत्र पंचायती राज विभाग के पास लंबित है। यह 26922.39 करोड़ रुपये का है। दूसरे नंबर पर शिक्षा विभाग है। उसने 19212.69 करोड़ का उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने 2197.22 करोड़ का हिसाब नहीं दिया है। ऐसे कुछ विभागों में समाज कल्याण, नगर विकास एवं आवास, ग्रामीण विकास, एससी-एसटी कल्याण, पिछड़ा अति पिछड़ा वर्ग कल्याण, आपदा प्रबंधन तथा कृषि विभाग है। मार्च 2021 तक डीसी बिल प्रस्तुत नहीं करने के चलते कुल 26504 एसी बिल लंबित रहे। इसकी राशि 13,459.71 करोड़ है। रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2021 तक 252 व्यक्तिगत जमा खाते में 3,811.33 करोड़ रुपये थे। आमदनी और खर्च दोनों बढ़ा रिपोर्ट कहती है कि पिछले वर्ष की तुलना में 2020 में 21 के दौरान राजस्व प्राप्तियों में 3,936 करोड़ (3.17% ) की वृद्धि हुई। पिछले वर्ष की तुलना में 2020-21 में राजस्व व्यय में 13,476 करोड़ की वृद्धि हुई प्रतिशत में इसकी मात्रा 10.69% है। पिछले वर्ष की तुलना में 2020-21 में पूंजीगत व्यय में 5,905 करोड़ (47.99% ) की वृद्धि हुई। राजकोषीय घाटा और बढ़ा, 29827 करोड़ तक पहुंचा सीएजी के अनुसार वित्तीय वर्ष के दौरान 29,827 करोड़ का राजकोषीय घाटा हुआ। यह पिछले वर्ष की तुलना में 15103 करोड़ से बढ़ गया। 2020-21 के दौरान, बिहार को 2004-05 के बाद दूसरी बार 11325 करोड़ रुपये के राजस्व घाटा का सामना करना पड़ा।ऋण बढ़ा  एक साल में 29,035 करोड़ का इजाफा रिपोर्ट के अनुसार वर्ष के अंत में बकाया लोक ऋण (1,77,214.85 करोड़), पिछले वर्ष की तुलना में 29,035 करोड़ बढ़ गया। सरकार के प्रतिबद्ध व्यय में मुख्यतः वेतन एवं मजदूरी पर व्यय (21,841.65 करोड़), पेंशन (19,635.15 करोड़) तथा ब्याज भुगतान (12,484.04 करोड़) पर व्यय शामिल है। कुल प्रतिबद्ध व्यय (53,960.84 करोड़), राजस्व व्यय ( 38.68% ) का प्रमुख अंतिम तिमाही में 59% खर्च 13 विभागों के कुल खर्च 25151.25  से 14838.40 करोड़ (रिपोर्ट के अनुसार) घटक है। 31 मार्च 2021 तक बकाया ॠण 21,743.77 करोड़ था। यह पिछले वर्ष की तुलना में 293.54 करोड़ बढ़ा। वर्ष के दौरान 2.20 करोड़ ब्याज की प्राप्ति हुई। सीएजी के अनुसार बिहार सरकार ने 2020-21 के दौरान एनएसडीएल/ट्रस्टी बैंकों में 1,976.81 करोड़ जमा किये। सरकार, एनपीएस के लिए संग्रहित राशि में से 23.04 करोड़ जमा करने में विफल रही।59 / का व्यय अंतिम 9837.20 करोड़ (39.11% ) का व्यय मार्च 2021 में हुआ।

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