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देश के दिव्यांगों को कैसे मिलेगा न्याय देश में इंफॉर्मेशन कमिश्नरों 165 पदों में से 42 पद खाली पड़े हैं।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : देश के दिव्यांगों कैसे मिलेगा न्याय देश में इंफॉर्मेशन कमिश्नरों 165 पदों में से 42 पद खाली पड़े हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, पंजाब और महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 4-4 सीट और उत्तराखंड, केरल, हरियाणा और केंद्र में 3-3 सीट खाली हैं। दो राज्यों- गुजरात और झारखंड में चीफ इंफॉर्मेशन कमिश्नर हैं ही नहीं। इंफॉर्मेशन कमिश्नर के कुल पदों में से 5%से भी कम पर महिलाएं बैठी हैं। इसका खुलासा मंगलवार को जारी हुई छठीं स्टेट ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट 2022 से हुआ है। यह रिपोर्ट ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया (TII) की तरफ से जारी की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक, सिर्फ 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ही RTI (राइट टु इंफॉर्मेशन यानी सूचना का अधिकार) एप्लीकेशन भरने के लिए ऑनलाइन पोर्टल मौजूद है। इन राज्यों में बिहार, गोवा, दिल्ली, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, मेघालय, मिजोरम, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु शामिल हैं। इस रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि RTI कानून के सख्त पालन के लिए सरकारी अधिकारियों को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। राइट टु इंफॉर्मेशन के रास्ते में अड़चन है राइट टु प्राइवेसी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में ट्रांसपेरेंसी लॉ का प्रभावी अमल नहीं हो पाता है। इसके पीछे कई कारण हैं जिनमें अधिकारियों की तरफ से जनता को जानकारियां नहीं देना, लोगों के प्रति पब्लिक इंफॉर्मेशन ऑफिसर का रूखा व्यवहार और जानकारी छुपाने के लिए राइट टु इंफॉर्मेशन एक्ट के प्रावधानों की गलत जानकारी देना, पब्लिक इंटरेस्ट क्या है इसकी जानकारी न होना और राइट टु प्राइवेसी जैसे कानून राइट टु इंफॉर्मेशन के रास्ते में अड़चन डालते हैं। सरकारी मुलाजिमों की मानसिकता अब भी कामों को खुफिया रखने की RTI एक्ट 2005 में बनाया गया था। इंफॉर्मेशन कमीशन के मुतााबिक, 2005-06 से 2020-21 के बीच राज्यों और केंद्र के पास 4.20 करोड़ से ज्यादा RTI एप्लीकेशन आई थीं। 2005 से अब तक इतने साल बाद भी ज्यादातर सरकारी मुलाजिमों और पब्लिक अथॉरिटीज की मानसिकता अभी भी सरकारी कामों को खुफिया रखने की ही है। इतने साल बाद भी RTI अर्जियों को सरकार पर बोझ समझा जाता है। इंफॉर्मेशन कमीशन रिटायर ब्यूरोक्रैट्स के लिए पार्किंग स्पेस जैसा TII के डायरेक्टर रमा नाथ झा ने कहा कि इंफॉर्मेशन कमीशन रिटायर होने वाले ब्यूरोक्रैट्स के लिए पार्किंग स्पेस जैसा होता जा रहा है। RTI एप्लीकेशन को रिजेक्ट करते समय पब्लिक इंफॉर्मेशन अफसर का लापरवाह रवैया भी इस कानून की राह में बड़ी चुनौती है। TII के चेयरपर्सन प्रोफेसर मधु भल्ला ने कहा कि अक्टूबर 12 को RTI एक्ट अमल में लाए जाने के 17 साल पूरे हो जाएंगे। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के इरादे से बनाए गए इस कानून को पूरी तरह लागू होने में अभी कई चुनौतियां हैं, इसलिए अभी सिर्फ आधी जंग जीती गई है।

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