आगरा कैंट रेलवे स्टेशन को दिव्यांग फ्रेंडली बनाकर सभी स्टेशनों की सुविधा को गायब कर देना है।

सर्वप्रथम न्यूज़ सौरभ कुमार : भारतीय रेलवे का प्रत्येक सुविधा पूरे भारत के सभी स्टेशनों पर एक समान लागू होता है और आप लोग जानते हैं सुगम भारत अभियान आज से 5 वर्ष पहले लागू हो चुका है यह उसी के तहत लागू हो सका है तो हमारा कहना है दिव्यांग समाज के तरफ से कि 5 वर्ष में आप एक योजना को एक स्टेशन पर लागू करवा सके हैं तो सभी स्टेशनों पर कब तक लागू करवाइएगा और भारतीय रेलवे का सभी सर्कुलर सभी स्टेशनों पर लागू होता है तो आपने एक स्टेशन पर क्यों लागू करवाए क्या यह भारत के दिव्यांगों के साथ छल तो नहीं कर रहा है भारतीय रेलवे यह स्टेशन पर सुविधा दिखाकर सभी स्टेशन की सुविधा को गायब कर रहा है हमें इस बात की आशंका है आइए जानते हैं क्या है योजना भारत सरकार दिव्यांग लोगों के लिए एक से बढ़कर एक शानदार योजनाओं को चला रही है. इसी क्रम में अब रेलवे ने भी एक कदम आगे बढ़ाते हुए आगरा कैंट को देश का सबसे पहला दिव्यांगजन फ्रेंडली स्टेशन बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है. आइए आपको बताते हैं कि दिव्यांग जनों को इस रेलवे स्टेशन के द्वारा क्या-क्या सुविधाएं मिलेंगे.तो चलिए पढ़ना कीजिए शुरू भारतीय रेलवे के अनुसार आगरा कैंट के इस स्टेशन पर नेत्रहीन, मूकबधिर,और पैर से दिव्यांग यात्रियों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान की जाएंगी. नेत्रहीन यात्रियों के लिए लुई ब्रेल लिपि साइनेज,तो वहीं मूक बधिरों की सहायता सांकेतिक भाषा जाने वाले रेल कर्मचारियों करेंगे.पैरों से दिव्यांग यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशन पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की जाएगी. उसके लिए इस स्टेशन पर पोर्टेबल रैंप भी लगाए जाएंगे.जिसकी मदद से यात्री ट्रेन मे चढ़ने के साथ-साथ अन्य जगह पर भी आराम से चढ़ सकेंगे.मूक बधिर लोगों को किसी भी तरह की कोई भी परेशानी ना हो. उसके लिए 250 रेल कर्मचारी सांकेतिक भाषा को सीखेंगे और उनकी मदद करेंगे. रेलवे ने दिव्यांगों के लिए सांकेतिक भाषा में कई वीडियो भी बनवाए हैं. वीडियो की द्वारा मूक बधिर यात्रियों को काफी सहायता मिलेगी.उम्मीद करते हैं ये जानकारी आपको पसंद आई होगी बहुत खेद की बात है कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 में जो बातें लिखित है वर्णित है और पारित और जी से कानून का रूप दे दिया गया है वह महज 1से दो स्टेशनों पर भारतीय रेलवे लागू करवा अपना पीठ थपथपा रहा है और दिव्यांगों के सर्कुलर में सामाजिक कल्याण न्याय एवं अधिकारिता विभाग भारत सरकार से 5 वर्ष पहले नियम पर विचार कर लिए गए और इसे कानूनी रूप देने की बात कही गई लेकिन सभी स्टेशनों पढ़ रहा होगा एक स्टेशन पर सुगम भारत अभियान यह कहीं से जायज नहीं है तो दिव्यांग अधिक खुश नहीं हो जब तक यह सुविधा पूरे भारत में लागू नहीं हो जाता है दिव्यांगजन कहते हैं कि घोटाला कहां है घोटाला दिखता नहीं है तो आप इस पर विचार कीजिए कि एक कानून जो 2 विभागों से पारित होता है सभी रेलवे स्टेशनों के लिए सुविधा मात्र एक रेलवे स्टेशन पर प्राप्त होता है तो इसे क्या कहेंगे सुविधा का घोटाला कहेंगे अपने अधिकार के प्रति जागरूक हो भारत का दिव्यांग समाज।

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